MPPSC Mains 2021 Paper IA
कौमुदी महोत्सव
प्राचीन भारत में मनाया जाने वाला एक उत्सव था। यह कौमुदी के दिन (अर्थात् कार्तिक मास की पूर्णिमा) मनाया जाता था। इसे प्रेम, हास्य, सौंदर्य, समृद्धि, कला और शिक्षा का उत्सव माना जाता था।
कौमुदी महोत्सव का एक संस्कृत नाटक भी है, जो कर्नाट की रानी विज्जिका (अथवा विजयभट्टारिका अथवा विजयाम्बिका) की रचना है। यह नाटक पाँच काण्डों में है, और पाटलिपुत्र के राजकुमार कल्याणवर्मन के प्रेम-प्रसंग पर आधारित है।
सूत्रअध्यक्ष
सूत्रों का अधिकारी या सूत्रों का प्रबंधक।1 यह एक संस्कृत शब्द है, जिसमें सूत्र का मतलब है धागा या सिद्धांत और अध्यक्ष का मतलब है प्रमुख या निरीक्षक।
सूत्रअध्यक्ष का प्रयोग कुछ पाठों, नाटकों और साहित्यिक कृतियों में हुआ है, जैसे कि कौमुदी महोत्सव, मुकुन्दमाला आदि।
श्री हर्ष सीयक
श्री हर्ष सीयक एक प्रसिद्ध राजा और कवि थे, जो परमार वंश के थे। उन्होंने 10वीं सदी में मालवा में अपना राज्य स्थापित किया और राष्ट्रकूटों, प्रतिहारों, हूणों और अन्य शत्रुओं को परास्त किया।
श्री हर्ष सीयक के पुत्र मुंज और पौत्र राजा भोज भी प्रसिद्ध राजा और कवि थे।
स्वतंत्र परमार साम्राज्य की स्थापना : हर्ष अथवा सीयक द्वितीय (945- 972 ईस्वी) परमार वंश को स्वतंत्र स्थिति में लाने वाला पहला शासक हर्ष था जो वैरिसिंह द्वितीय का पुत्र था। यह सीयक द्वितीय के नाम से भी जाना जाता था। वैरिसिंह के समय में प्रतिहारों ने मालवा पर अधिकार कर लिया था।
चाँदबीबी
चाँद बीबी एक भारतीय मुस्लिम महिला योद्धा थीं, जिन्हें चाँद खातून या चाँद सुल्ताना के नाम से भी जाना जाता है। वह अहमदनगर के हुसैन निज़ाम शाह प्रथम की बेटी और बीजापुर के अली आदिल शाह प्रथम की पत्नी थीं।
उन्होंने बीजापुर सल्तनत (1580-1590) की संरक्षक और अहमदनगर सल्तनत (1596-1599) की शासिका के रूप में कार्य किया।
चाँद बीबी को सम्राट अकबर के मुगल सेना से अहमदनगर की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, जो 1595 में हुई।
अमिनी आयोग
5. वॉरेन हेस्टिंग्स ने भारतीय कृषि प्रणाली के बारे में व्यवस्थित जानकारी इकट्ठा करने के लिए 1776 में अमिनी आयोग की नियुक्ति की
अमिनी आयोग भारत के भूमि संसाधनों का मूल्यांकन करने के लिए गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स द्वारा स्थापित एक राजस्व जांच आयोग था ताकि अगला राजस्व समझौता निष्पक्ष रूप से किया जा सके।
अमिनी आयोग का नाम इसके अध्यक्ष मुहम्मद रज़ा खान के नाम पर रखा गया था, जिन्हें अमीन-उल-मुल्क या अमिनी के नाम से भी जाना जाता था।
बकाश्त
बिहार में 1937-39 के दौरान, स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बकाश्त मूवमेंट का आयोजन किया था। यह आंदोलन जमींदारों द्वारा बकाश्त भूमि से किरायेदारों के निकाले जाने के खिलाफ था।
बकाश्त भूमि का मतलब है, “वह भूमि, जो किसी किसान के पुरखों से पुरानी हो, परन्तु पुरखों के समय में ही किसी प्रकार से प्रत्यक्ष-प्रमाण-पत्र से सिद्ध न हो”।
बकाश्त मूवमेंट के परिणामस्वरूप, 1938 में बिहार किरायेदारी अधिनियम (Bihar Tenancy Act) और बकाश्त भूमि कर (Bakasht Land Tax) पारित हुए, जो किरायेदारों के हकों की सुरक्षा करने में मदद करते हैं।
बकाश्त मूवमेंट पूरे बिहार में फैला हुआ था, और किसान सभा (Kisan Sabha) ने किसानों को संगठित और प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हृदय नाथ कुंजरू
हृदय नाथ कुंजरू (1 अक्टूबर 1887-3 अप्रैल 1978) भारत के प्रमुख स्वतन्त्रता सेनानी थे। वे भारतीय संविधान के निर्माण के लिए गठित संविधान सभा के एक सदस्य थे ,राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य
भारतीय स्वतंत्रता बिल
भारतीय स्वतंत्रता बिल 18 जुलाई 1947 को पारित हुआ, 14-15 अगस्त 1947 को लागू हुआ, और 26 जनवरी 1950 को समाप्त हुआ, जिसके साथ ही भारतीय संविधान (Indian Constitution) प्रभावी हुआ।
कर्मवीर
जबलपुर से कर्मवीर का प्रकाशन 1920 से प्रारंभ हुआ जिसे माखनलाल चतुर्वेदी ने अपने सम्पादन में शिखेर तक पहुचाया और जनजन तक क्रांति के विचारों को फैलाया
माच
माच मालवा का पारंपरिक लोक नृत्य है लोकरंग की दृष्टि से माच को लोक का संपूर्ण लोकनाट्य कहा जाता है। मध्यप्रदेश सरकार ने माच को राजकीय लोकनाट्य का दर्जा प्रदान किया है।
मालवा क्षेत्र का लोकनाट्य माच लगभग 300 वर्ष प्राचीन है, जिसका उद्भव राजस्थान के ख्याल से माना जाता है। मध्यप्रदेश में माच की परंपरा का प्रारंभ मुख्य रूप से उज्जैन से हुआ। माच नाट्य का प्रारंभ रात्रि के प्रथम पहर में होता है।
बरमानमेला
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बरमान शहर में हर साल जनवरी महीने में आयोजित होता है। यह मेला मकर संक्रांति से प्रारम्भ होता है और 13 दिनों के लिए चलता है
जैजाकभुक्ति
जैजाकभुक्ति एक प्राचीन भारतीय भूगोल में उल्लेखित एक प्रदेश का नाम है, जो मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित था। इस प्रदेश के शासकों को चन्देल कहा जाता है, जो कलचुरि वंश की एक शाखा थे। चन्देलों का सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा धंग (950-1008) था, जिसने खजुराहो में सुंदर मंदिरों का निर्माण कराया।
तुकोजीराव होल्कर (तृतीय) (1903.1926)
शिवाजी राव होलकर के पुत्र तुकोजीराव होलकर तृतीय थे। जिन्हें 1903 में होलकर वंश का उत्तराधिकारी बनाया गया।
इनकी अल्प आयु होने के कारण इनका शासन संचालन के लिए एक कौसिंल की नियुक्ति की गई। जिसके अंतर्गत होलकर वंश के अधिकांश जनकल्याणकारी कार्य पूर्ण किए जाते थे।
इनके द्वारा सन 1923 में इंदौर में नवरत्न मंदिर का निर्माण करवाया जिसे आज केन्द्रीय संग्रहालय के रूप में रूपांतरित कर दिया गया है।
अंग्रेजों का सहयोग नहीं करने के कारण अंग्रेजों द्वारा आरोप लगाकर गद्दी से अपदस्थ कर यशवंत राव होल्कर तृतीय को शासक बनाया।
दोस्त मोहम्मद खान
1707-1728 मध्य भारत में भोपाल राज्य के संस्थापक थे । जो मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी थी ।



